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भारत नेपाल संबंध

भारत नेपाल संबंध : भारत अपनी सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक अन्य विषयों को लेकर हमेशा देश विदेशों में चर्चा में ही रहता है | अभी हाल में  भारत का अन्य देशों के साथ संबंधों को लेकर एक अहम विषय बन गया है | जैसे कि भारत – नेपाल के बीच संबंध और नेपाल में चीन के बढ़ रहे हस्तक्षेप पर चर्चा..|

इस कोरोना वायरस के दौरान जहां सारे देश इस बीमारी से लड़ने के विभिन्न उपाय ढूंढ रहे हैं वही भारत को इस बीमारी के साथ और भी बहुत  चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है|| कभी लद्दाख के सीमा पर चीन घुसपैठियों से झड़प तो कहीं चीन से प्रभावित हुए नेपाल की आवाम का भारत से तंगी| जबकि शुरू से देखा जाए तो भारत ने नेपाल की हमेशा मदद की है और अपने संबंधों को सरल और मैत्रीपूर्ण ही रखा है|

क्योंकि नेपाल ,भारत का एक महत्वपूर्ण पड़ोसी है और इतने समय से चले आ रहे भौगोलिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक संबंधों के कारण वह हमारी विदेश नीति में भी विशेष महत्व रखता है|

● भारत और नेपाल के धर्म में भी समानता है ,वह हिंदू और बौद्ध धर्म में संबंध साझा करते हैं|

अभी हाल में ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग नेपाल के दौरे पर गए| उनसे पहले सन् 1996 में जियांग जमीन ने नेपाल का भ्रमण किया था| चीनी राष्ट्रपति ने दौरे के दौरान अपनी और नेपाल के संबंधों को मजबूत करने के लिए दोनों देशों के  बीच 20 समझौतों पर हस्ताक्षर किए और नेपाल के विकास कार्यक्रमों के लिए 56 अरब नेपाली रुपयों की सहायता देने की भी घोषणा की| वर्ष 2015 में आए भूकंप के बाद काठमांडू को तातोपानी ट्रांजिट प्वाइंट से जोड़ने वाले अनिर्को राजमार्ग को भी चीनी राष्ट्रपति ने दुरुस्त करने का वादा किया|

भारत नेपाल संबंध
भारत नेपाल संबंध

भारत नेपाल संबंध : भारत के लिए भी नेपाल से संधि करके रहना है अत्यंत महत्वपूर्ण आइए जानते हैं क्यों?

नेपाल ,भारत के 5 राज्य उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार के साथ सीमा साझा करता है| जिससे वह भारत के लिए सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों का महत्वपूर्ण स्रोत है|

नेपाल, भारत के साथ खुली सीमा साझा करता है और दोनों देशों के बीच अगर संबंध अच्छे नहीं रहे तो भारत को अवैध प्रवासी ,जाली मुद्रा, ड्रग और मानव तस्करी जैसे गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है|

नेपाल का पशुपतिनाथ मंदिर
नेपाल का पशुपतिनाथ मंदिर

कुछ हिंदू और बौद्ध मंदिर में भी नेपाल में स्थित है जिसकी वजह से नेपाल भारत के लिए सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है|नेपाल के जनकपुर में स्थित राम जानकी मंदिर जो भारतीय आवाम के लिए अत्यंत मायने रखता है| कहा जाता है कि सीता जी का जन्म जनकपुर नेपाल में ही हुआ था और पुराने समय से चले आ रहे भारत- नेपाल के मित्रता से भारतीय नागरिक भी बिना किसी रूकावट के मंदिर यात्रा को जाते हैं| बिहार से इस मंदिर के नजदीक होने की वजह से बिहार के नागरिकों के लिए यह मंदिर धार्मिक दृष्टि से अहम भूमिका निभाता है|

भारत- नेपाल की खुली सीमा की वजह से लोगों को एक दूसरे देशों में आवागमन के लिए भी किसी वीजा या पासपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ती|

भारत- नेपाल का महत्वपूर्ण भागीदार होने के साथ विदेशी निवेश का भी बड़ा स्त्रोत है|

भारत -नेपाल ने अपने नागरिकों के बीच संपर्क बढ़ाने वार्षिक विकास में बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कनेक्टिविटी कार्यक्रम शुरू किए|

हाल ही में भारत के रक्सौल को काठमांडू से जोड़ने के लिए इलेक्ट्रिक रेल ट्रैक बिछाने पर दोनों देशों की सरकारों की सहमति से हस्ताक्षर किए गए थे|

नेपाल में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं जिनमें डॉक्टर, इंजीनियर, मजदूर, व्यापारी आदि शामिल है|

भारत नेपाल संबंध की वर्तमान स्थिति

इतने समय से चले आ रहे भारत- नेपाल के अच्छे संबंधों से नेपाल हमेशा लाभान्वित रहा है |लेकिन जैसे कि इन दिनों दोनों देशों के बीच तनाव का माहौल बना हुआ है |नेपाल और भारत के बीच करीब 1880 किलोमीटर की सीमा खुली हुई है  जहां से  कि दोनों देशों की आवाजाही होती है| दोनों देशों ने 98 फीसदी सीमा को कवर करने वाले नक्शे का अंतिम निर्णय तय किया लेकिन लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधूरा  वह 3 क्षेत्र है जिन पर तनाव जारी है|

अभी हाल ही में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने धारचूला से लिपुलेख के मार्ग निर्माण का उद्घाटन किया था जिसे नेपाल के राष्ट्रपति ने विरोध जाहिर किया उनका कहना है लिपुलेख, कालापानी, लिंपियाधूरा कुल 370 वर्ग किलोमीटर के दायरे में है जिसे वे नेपाल की जमीन बताते हैं| लिपुलेख पास भारतीय राज्य उत्तराखंड को चीन के तिब्बत से जोड़ता है|नेपाल के अधिकारियों का मानना है कि यह तीनों क्षेत्र नेपाल के नक्शे में आता है जबकि इन तीनों क्षेत्रों पर पिछले 60 साल से भी अधिक समय से भारत नियंत्रण कर रहा है| इस क्षेत्र में रहने वाले लोग भारतीय हैं, भारत को टैक्स देते हैं और भारतीय चुनाव में वोट डालते हैं|

भारत के लिए लिपुलेख का मामला सुरक्षा से जुड़ा है

लिपुलेख विवाद
लिपुलेख विवाद (सोर्स- kathmandupost)

लिपुलेख पास भारतीय राज्य उत्तराखंड को चीन के तिब्बत से जोड़ता है ,जिससे कि वर्तमान परिस्थिति की वजह से ही चिंताजनक विषय है| भारत-नेपाल की खुली सीमा की वजह से चीनी घुसपैठियों का भारतीयों पर आसानी से हमला करना मुमकिन है|

जिस को रोकने के लिए लिपुलेख, कालापानी, लिंपियाधूरा पर भारतीय सेना की सुरक्षा बल तैनात है|

भारत नेपाल संबंध और आगे समझौते की बात

भारत- नेपाल के वर्तमान संबंधों को लेकर अभी दोनों देशों में तनातनी का माहौल है| परंतु इसका समाधान भी दोनों पक्षों को समझदारी से मिलकर करना होगा| नेपाल सरकार ने कहा कि दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को ध्यान में रखते हुए ऐतिहासिक संधि, दस्तावेजों ,तथ्यों और नक्शा के आधार पर सीमा के मुद्दों का कूटनीतिक हल प्राप्त करने को  तैयार है|भारत को भी अपने विदेश नीति पर विचार करने की जरूरत है भारत को नेपाल की हक में अपनी नीति दूरदर्शी बनानी होगी| जिस तरह से नेपाल में चीन का प्रभाव बढ़ रहा है ,उससे भारत को अपने पड़ोस में आर्थिक शक्ति का प्रचार करने से पहले रणनीतिक लाभ हानि पर विचार करना होगा|

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