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भारत अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर चीन पर नए सिरे से कार्रवाई कर सकता है

पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) कई सेना स्तरीय बातचीत के बाद भी पांगोंग त्सो और गोगरा की फॉरवर्ड पोसिशन्स से हटी नहीं है। तो वही मोदी सरकार चीन को आर्थिक मोर्चे पर और चोट पहुंचाने की सोच रही है। इससे सरकार चीन को भारत की व्यापारिक अहमियत दिखाना चाहती है।

India China tensions
सीमा विवाद को लेकर दोनों देश हैं आमने सामने

इस मुद्दे पर सरकारी अधिकारियों के अनुसार, शीर्ष चीन अध्ययन समूह (CSG) ने सोमवार को लद्दाख में जमीन पर पीएलए पर कार्रवाई और तिब्बत के कब्जे वाले अक्साई चिन क्षेत्र में अपनी सैन्य स्थिति पर चर्चा की। CSG, जिसमें भारत के सबसे वरिष्ठ मंत्री, सैन्य नेता और सदस्य के रूप में शामिल थे ,यही निकाय है जो चीन के खिलाफ कार्रवाई पर देश के एक्शन प्लान का सुझाव देता है।

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चीन चाहता है कि भारत एक-के-बाद-एक आधार पर राजनयिक संबंधों को सामान्य करे, पर वही मोदी सरकार का दृढ़ता से मानना ​​है कि स्थिति सामान्य करने के लिए चीनी सेना कोलद्दाख क्षेत्र में पीछे हटना होगा । आक्रामक होने के बावजूद, PLA का मानना ​​है कि उसके सैनिक लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) की अपनी धारणा के भीतर ही हैं। इसी वजह से वह गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स के साथ-साथ पैंगोंग त्सो झील पर अभी भी मोर्चा संभाले हुए है ।

वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, भारतीय सेना को लद्दाख में 1597 किलोमीटर एलएसी की फॉरवर्ड पर बने रहने के लिए कहा गया है।

5 जुलाई को, भारतीय विशेष प्रतिनिधि ने दो घंटे से अधिक समय तक अपने चीनी प्रतिनिधिओं से सीमा विवाद पर बात हुई थी ।

बातचीत में दोनों पक्षों ने तय करा था की दोनों सेनाए पीछे हटेंगी परन्तु एक महीने बाद भी सेनाएं पीछे नहीं हटी हैं।

अब जब अमेरिका ने जासूसी के लिए हुआवेई और उसके सहायक संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की है, तो यह स्पष्ट है कि भारत चीनी संचार और बिजली कंपनियों को भविष्य की किसी भी परियोजना से बाहर रखेगा।

मोदी सरकार इस सन्दर्भ में स्पष्ट है कि द्विपक्षीय संबंध सीमा शांति के साथ सीधे जुड़े हुए हैं और अतीत की तरह इस मुद्दे को ऐसे ही जाने नहीं दिया जाएगा ।

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